दर्द शायरी

कुछ उम्दा किस्म के जज़्बात हैं हमारे

कुछ उम्दा किस्म के जज़्बात हैं हमारे,कभी दिल से समझने की तकलुफ़्फ़् तो कीजिए।

उसके चेहरे पर इस क़दर नूर था

उसके चेहरे पर इस क़दर नूर था,कि उसकी याद में रोना भी मंज़ूर था,बेवफा भी नहीं कह सकते उसको ज़ालिम,प्यार तो हमने किया है वो तो बेक़सूर था।

मोहब्बत की कश्ती में

मोहब्बत की कश्ती में सोच समझ कर सवार होना मेरे दोस्त,जब ये चलती है तो किनारा नहीं मिलता,और जब डूबती है तो सहारा नहीं मिलता..

ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा

ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक हैं,तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक हैंवफ़ा की उम्मीद, जिन्हें होगी उन्हें होगी,हमें तो देखना है, तू बेवफ़ा कहाँ तक हैं.

हँसी यूँ ही नहीं आई है

हँसी यूँ ही नहीं आई है इस ख़ामोश चेहरे पर…..कई ज़ख्मों को सीने में दबाकर रख दिया हमने !

उस दिल की बस्ती में

उस दिल की बस्ती में आज अजीब सा सन्नाटा है, जिस में कभी तेरी हर बात पर  महफिल सजा करती थी।

पत्थर की दुनिया जज़्बात नही समझती

पत्थर की दुनिया जज़्बात नही समझती,दिल में क्या है वो बात नही समझती,तन्हा तो चाँद भी सितारों के बीच में है,पर चाँद का दर्द वो रात नही समझती।

जख्म जब मेरे सीने के भर जायेंगें

जख्म जब मेरे सीने के भर जायेंगें …. आसूं भी मोती बन कर बिखर जायेंगें …. ये मत पूछना किस-किस ने धोखा दिया …. वर्ना कुछ अपनों के चेहरे उतर जायेंगें

जन्नत मैं सब कुछ हैं

जन्नत मैं सब कुछ हैं मगर मौत नहीं हैं .. धार्मिक किताबों मैं सब कुछ हैं मगर झूट नहीं हैं दुनिया मैं सब कुछ हैं लेकिन सुकून नहीं हैं इंसान मैं सब कुछ हैं मगर सब्र नहीं हैं

ना मिलता गम तो बर्बादी के

ना मिलता गम तो बर्बादी के अफसाने कहाँ जाते …. दुनिया अगर होती चमन तो वीराने कहाँ जाते ….. चलो अच्छा हुआ अपनों मैं कोई ग़ैर तो निकला…. सभी अगर अपने होते तो बेगाने कहाँ जाते ……